नवमी पर हवन-पूजन और कन्या पूजन कर मां दुर्गा का लिया आशीर्वाद

शीशगढ़ में महानवमी पर श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन और कन्या पूजन कर मां दुर्गा की आराधना की। कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाकर उपहार भेंट किए।

नवमी पर हवन-पूजन और कन्या पूजन कर मां दुर्गा का लिया आशीर्वाद
HIGHLIGHTS:

महानवमी पर श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन कर मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना की।



कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर तिलक लगाया, प्रसाद खिलाया और उपहार भेंट किए।



धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं ने व्रत का पारण कर मां दुर्गा का आशीर्वाद लिया।

जन माध्यम
शीशगढ़।
शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर महानवमी के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से हवन-पूजन कर मां दुर्गा की आराधना की। इस दौरान घरों और मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। नवरात्र के अंतिम दिन कन्या पूजन कर देवी स्वरूपा बालिकाओं का सम्मान किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने व्रत का पारण किया।

हवन-पूजन कर की सुख-शांति की कामना

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु श्रद्धा और आस्था के साथ हवन-पूजन करते हैं। मान्यता है कि हवन में आहुतियां अर्पित करने से वातावरण शुद्ध होता है और घर-परिवार में सकारात्मकता व सुख-शांति का संचार होता है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना कर सभी के कल्याण की प्रार्थना की।

कन्या पूजन कर किया बालिकाओं का सम्मान

नवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व रहा। श्रद्धालुओं ने छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका आदर-सत्कार किया। परंपरा के अनुसार, कन्याओं को घर आमंत्रित कर उनके चरण धोए गए, तिलक लगाया गया और कलावा बांधकर पूजन किया गया। इसके बाद उन्हें हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाया गया। भोजन के उपरांत कन्याओं को दक्षिणा और उपहार भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया गया।

धार्मिक परंपरा में कन्या पूजन को नारी शक्ति के सम्मान और देवी आराधना का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान एक बालक को भी आमंत्रित करने की परंपरा है, जिसे लांगुर अथवा भैरव स्वरूप माना जाता है।

भक्ति और श्रद्धा के साथ संपन्न हुए अनुष्ठान

नवरात्र के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के बीच भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। मां दुर्गा के जयकारों और भजन-कीर्तन के बीच पूजा-अर्चना की गई। हवन में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई। कन्या पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने देवी स्वरूपा बालिकाओं को श्रद्धापूर्वक विदा किया।

नवरात्र का पर्व सत्य, धर्म, सेवा, सद्भाव और नारी सम्मान का संदेश देता है। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की।