शहादत को सलाम, वर्दी के हर फर्ज को नमन : एडीजी

पुलिस स्मृति दिवस पर एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसएसपी अनुराग आर्य ने शहीद जवानों को पुष्पचक्र अर्पित कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

शहादत को सलाम, वर्दी के हर फर्ज को नमन : एडीजी
बरेली पुलिस लाइन में पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते पुलिस अधिकारी।
HIGHLIGHTS:

देश की हिफाजत में प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों की शहादत को किया नमन

कर्तव्य, साहस और समर्पण की मिसाल बने शहीद जवान, उनकी कुर्बानी पुलिस बल की अमूल्य विरासत

पुलिस स्मृति दिवस ने याद दिलाया वर्दी का फर्ज, जनसेवा और राष्ट्ररक्षा का संकल्प

जन माध्यम
बरेली। वर्दी केवल पहचान नहीं, बल्कि देश की हिफाजत का वह पाक फर्ज है, जिसके सामने अपने प्राणों की परवाह भी छोटी पड़ जाती है। जब कर्तव्य की राह पर कदम बढ़ते हैं, तो घर परिवार की खुशियां, अपनों का इंतजार और जिंदगी के तमाम अरमान पीछे छूट जाते हैं। रह जाती है तो सिर्फ मातृभूमि की सुरक्षा और जनता की सलामती की जिम्मेदारी। ऐसे ही जांबाज सिपाहियों की याद में बुधवार को पुलिस लाइन स्थित शहीद स्मारक पर माहौल श्रद्धा, सम्मान और भावुकता से भर उठा। पुलिस स्मृति दिवस पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने कर्तव्य की बलिवेदी पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर एडीजी जोन रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसएसपी अनुराग आर्य ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सपूतों की शहादत को नमन किया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन जवानों के सर्वोच्च बलिदान को याद किया, जिन्होंने राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी।

पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है। लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दस वीर जवान शहीद हो गए थे। विषम परिस्थितियों में भी इन जवानों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हीं वीर सपूतों की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन सभी पुलिसकर्मियों को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की परवाह नहीं की।

वर्दी का मान, जनता की सुरक्षा

पुलिस सेवा महज नौकरी नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन, ईमानदारी और जनसेवा का संकल्प है। अपराध नियंत्रण से लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने तक पुलिसकर्मी हर दिन अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं। कई बार उनके सामने ऐसे हालात आते हैं, जहां एक पल का फैसला जिंदगी और मौत के बीच अंतर बन जाता है। इसके बावजूद वे आमजन की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं।

शहीद जवानों की कुर्बानी हमें यह एहसास कराती है कि सुरक्षित समाज के पीछे कितने त्याग और बलिदान की कहानियां छिपी हैं। किसी घर का बेटा, किसी मां की आंखों का तारा और किसी परिवार का सहारा जब वर्दी में देश के लिए निकलता है, तो उसका कर्तव्य पूरे राष्ट्र की उम्मीद बन जाता है।

पुलिस स्मृति दिवस पर अधिकारियों ने शहीदों के अदम्य साहस, अटूट निष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। शहीदों की शहादत पुलिस बल की गौरवशाली परंपरा है और उनकी याद हर पुलिसकर्मी को ईमानदारी, निष्ठा तथा जनसेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।