चुनाव आयोग के खिलाफ वामपंथी दलों ने उठाई कार्रवाई की मांग

बरेली में सीपीआई और सीपीआई(एम) ने राष्ट्रपति को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में एसआईआर, मतदाता सूची और ईवीएम से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की गई।

चुनाव आयोग के खिलाफ वामपंथी दलों ने उठाई कार्रवाई की मांग
HIGHLIGHTS:

सीपीआई और सीपीआई(एम) ने राष्ट्रपति को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा।

एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों में कार्रवाई की मांग।

ईवीएम से जुड़े कथित चुनावी अनियमितताओं और आंदोलनकारियों के उत्पीड़न की जांच का मुद्दा उठाया।

जन माध्यम
बरेली।
लोकतंत्र की बुनियाद मतदाता के भरोसे पर टिकी होती है। मतदाता सूची में दर्ज हर नाम नागरिक के उस अधिकार का प्रतीक है, जिसके जरिए वह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करता है। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। दोनों वामपंथी दलों ने राष्ट्रपति को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपकर मतदाता सूची, एसआईआर और ईवीएम से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की।

सीपीआई और सीपीआई(एम) के राष्ट्रीय आह्वान पर सौंपे गए मांगपत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई।

वामपंथी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना नागरिक के मतदान अधिकार से जुड़ा अहम विषय है। ऐसे में नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता को अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित होने की आशंका न रहे। हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मांगपत्र में चुनाव प्रक्रिया के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के माध्यम से कथित धांधली के आरोपों की जांच कराने की मांग भी शामिल रही। प्रतिनिधियों ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव से जुड़ी शिकायतों की जांच और उनका उचित निस्तारण जरूरी है।

वामपंथी दलों ने जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों, नौजवानों, किसानों और महिलाओं के कथित उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना और मांगों के समर्थन में आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। आंदोलन कर रहे लोगों की शिकायतों को सुनकर उनका समाधान तलाशा जाना चाहिए।

उन्होंने मांगपत्र के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने और संबंधित मामलों में उचित कार्रवाई की मांग रखी। इस दौरान मतदाता अधिकारों की सुरक्षा, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

राष्ट्रपति को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपने वालों में राजेश तिवारी, सतीश कुमार सिंह, पंकज सक्सेना, वीरपाल और राम किशोर समेत अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वामपंथी दलों ने मांगपत्र के जरिए अपने विरोध और मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया।