इंस्पेक्टर की दुकान, भ्रष्टाचार का सामान: एसएसपी अनुराग आर्य की सख्ती से फूटी भ्रष्टाचार की फोड़ी, तीन सस्पेंड

इंस्पेक्टर की दुकान, भ्रष्टाचार का सामान: एसएसपी अनुराग आर्य की सख्ती से फूटी भ्रष्टाचार की फोड़ी, तीन सस्पेंड

बरेली। शहर का थाना बारादरी अपराधियों के लिए खौफ पैदा करने वाला ठिकाना होना चाहिए था। मगर, खुद एक सुरक्षित व्यापार केंद्र बन गया। फर्क बस इतना था कि यहाँ सबकुछ गैरकानूनी था—अवैध शराब, नशा और पुलिस की जेब गर्म करने वाले खेल। पर इस बार खेल बिगड़ गया क्योंकि एसएसपी अनुराग आर्य की नजरें इधर घूम गईं और जैसे ही उन्होंने सख्ती दिखाई थाने में हड़कंप मच गया। तीन पुलिसकर्मी तुरंत निलंबित हुए। पर असली सवाल यही इंस्पेक्टर साहब कब कटघरे में आएंगे।

इंस्पेक्टर धनंजय पांडे, कड़क अफसर या सिस्टम के खिलाड़ी

थाना बारादरी के इंस्पेक्टर धनंजय पांडे की कार्यशैली हमेशा से सवालों के घेरे में रही है। पहले जब वह थाना इज्जतनगर में थे तब भी उनकी प्रबंधन कला की खूब चर्चाएं थीं। लेकिन बारादरी की कमान संभालते ही उन्होंने अपनी पसंद के दो पुलिसकर्मियों को अपने साथ तैनात करवाया। आखिर क्यों? क्या यह टीम सिर्फ अपराध रोकने के लिए बनाई गई थी या फिर कुछ और खेल चल रहा था। अगर थाने में कोई गैरकानूनी काम हो रहा था और इंस्पेक्टर को पता नहीं था तो यह उनकी लापरवाही है। और अगर पता था और फिर भी कुछ नहीं किया, तो यह भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा प्रमाण है। आखिर, पुलिस के संरक्षण के बिना अपराध इतना बेखौफ कैसे पनप सकता है? 

तीन पुलिसकर्मीयों पर चला एसएसपी का हंटर

सूत्रों के मुताबिक थाना बारादरी के अंतर्गत श्यामगंज पुलिस चौकी के इलाके में सालों से नशे का कारोबार फल-फूल रहा था। इस धंधे के दो बड़े खिलाड़ी थे कल्लू राजपूत और उसका बेटा निखिल। हल्द्वानी से लाते थे गुड़ से बनी शराब, चरस और गांजा श्यामगंज और गंगापुर में सप्लाई होती थी माल। कल्लू पर 13 मुकदमे दर्ज है, फिर भी धंधा ठाठ से चल रहा था। अब सवाल उठता है कि अगर पुलिस ने तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया, तो क्या बाकी सब दूध के धुले हैं? क्या इंस्पेक्टर साहब सिर्फ फूल सूंघ रहे थे? या फिर जेबें गर्म कर रहे थे।इस बार भ्रष्टाचार पर एसएसपी अनुराग आर्य की गाज गिरी और तीन पुलिसकर्मी मुख्य आरक्षी मो. असलम, मुख्य आरक्षी पंकज पाठक और आरक्षी विवेक कुमार को निलंबित कर दिया। तीनों पर आरोप थे कि ये आँख मूंदकर अपराधियों को फलने-फूलने दे रहे थे।

वहीं इंस्पेक्टर की भूमिका पर भी सवाल उठते है अगर इंस्पेक्टर साहब को इस गोरखधंधे की खबर नहीं थी, तो वो इतने भोले कैसे? और अगर खबर थी और फिर भी कार्रवाई नहीं हुई, तो फिर उनका इरादा क्या था? अवैध शराब और नशे का धंधा खुलेआम चल रहा था। स्थानीय लोगों ने विरोध किया लेकिन उन्हें धमका दिया गया। पुलिस की आँखों के सामने सबकुछ होता रहा, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। क्या यह संभव है कि इंस्पेक्टर साहब को इसकी भनक तक न हो।