टेट के खिलाफ शिक्षकों का हुंकार

मथुरा में टेट विरोध को लेकर शिक्षकों का मशाल जुलूस, सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग तेज।

टेट के खिलाफ शिक्षकों का हुंकार
HIGHLIGHTS:

टेट लागू करने के विरोध में मशाल जुलूस

शिक्षकों और कर्मचारियों की बड़ी भागीदारी

गांधी मूर्ति पर हुई सभा में जताया आक्रोश

निर्णय वापस न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

श्याम बिहारी भार्गव। जन माध्यम
मथुरा। जब अधिकारों पर खतरा महसूस होता है, तो आवाजें सड़कों पर उतर आती हैं। मथुरा में शिक्षकों ने कुछ ऐसा ही किया, जब टेट लागू करने के विरोध में मशालों की रोशनी में गूंजता आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया।

अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ इकाई मथुरा के बैनर तले टैंक चौराहे से विकास बाजार स्थित गांधी मूर्ति तक विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में प्राथमिक, बेसिक और माध्यमिक के शिक्षक, कर्मचारी और युवा हाथों में मशाल लेकर टेट विरोधी नारे लगाते हुए शामिल हुए।

जुलूस के समापन पर गांधी मूर्ति स्थल पर एक सभा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने एक स्वर में टेट लागू करने के निर्णय को शिक्षकों के अधिकारों के खिलाफ बताया।

जिला संरक्षक योगराज चाहर, प्रांतीय संयुक्त मंत्री टीएससीटी शैलेंद्र यादव और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि यह फैसला शिक्षकों के अधिकारों का हनन है। वहीं प्रदीपिका फौजदार और चेतना सीमा ने कहा कि इस निर्णय से महिला शिक्षकों सहित सभी वर्ग प्रभावित हो रहे हैं।

मुनीश चौधरी, राजेंद्र चौधरी और गोविंद सिंह चौहान ने इसे शिक्षकों की अस्मिता और भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताया। अशोक प्रिय और सुरेशचंद ने कहा कि इसका असर समाज के कमजोर वर्गों के युवाओं पर भी पड़ेगा।

नरेंद्र चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज और उग्र किया जाएगा। ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर किसान और शिक्षक एक साथ खड़े हैं।

सभा के दौरान अशोक कुमार बौद्ध, खेमसिंह और सुरजीत सिंह सहित कई अन्य पदाधिकारियों ने भी इसे अधिकारों की लड़ाई बताया। मीडिया प्रभारी मनीष दयाल ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों पर जबरन टेट थोपना अन्याय है और इसका खुलकर विरोध जारी रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी पदाधिकारियों और मौजूद लोगों ने एक स्वर में सरकार से टेट लागू करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।