गरीब की मजबूरी, दबंगों की रंगदारी
बरेली में एक गरीब ठेले वाले से दबंग दुकानदारों ने एक साल में 3.60 लाख रुपये वसूले। पैसे रोकने पर झूठे मुकदमे और जान से मारने की धमकी दी गई, SSP ने जांच के आदेश दिए हैं।
➡️ गरीब ठेले वाले से एक साल में 3.60 लाख की अवैध वसूली
➡️ मजबूरी का फायदा उठाकर की गई ब्लैकमेलिंग
➡️ झूठे छेड़छाड़ केस और जान से मारने की धमकी
➡️ भाई की गंभीर बीमारी का उठाया गया फायदा
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बरेली में ठेले वाले से एक साल में 3.60 लाख की वसूली, झूठे मुकदमे और जान से मारने की धमकी
जन माध्यम | बरेली।
बरेली में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गरीब ठेले वाले की मजबूरी को दबंग दुकानदारों ने क्रूर शोषण का हथियार बना लिया। महाराणा प्रताप जिला अस्पताल के पास वस्त्र महल के सामने फुटपाथ पर बच्चों के कपड़े और मोजे बेचकर परिवार पालने वाला मजदूर बीते एक साल से डर, धमकी और ब्लैकमेलिंग का शिकार रहा। पीड़ित के अनुसार उससे जबरन रंगदारी वसूली गई और अब झूठे छेड़छाड़ के मुकदमे में फंसाने व जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। मामले में SSP ने जांच के आदेश दिए हैं।
पीड़ित के बड़े भाई आजम दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। ऑपरेशन और इलाज के भारी खर्च ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। इसी मजबूरी को भांपकर वस्त्र महल की मालकिन सीमा अरोड़ा और उसके पुत्र अनमोल ने ठेले वाले पर दबाव बनाना शुरू किया। आरोप है कि साफ शब्दों में कहा गया—
“यहां ठेला लगाना है तो रोज़ एक हजार रुपये देने होंगे, और एक साल बाद रकम बढ़ेगी, वरना ठेला नहीं लगने देंगे।”
डर और लाचारी में गरीब मजदूर ने लगभग एक साल में 3 लाख 60 हजार रुपये कैश और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए दे दिए। बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन इसके गवाह बताए जा रहे हैं। कर्ज बढ़ता गया, घर में भूख तक के हालात बने, लेकिन दबंगों का लालच कम नहीं हुआ। परिवार की मजबूरी उनके लिए अवैध वसूली का जरिया बन गई।
स्थिति तब और भयावह हो गई जब पीड़ित ने 5–6 दिन पहले पैसे देना बंद किया। आरोप है कि इसके बाद सीमा अरोड़ा और अनमोल खुलेआम रंगदारी मांगने लगे और धमकी दी कि यदि ठेला नहीं हटाया गया या पैसे दोबारा नहीं दिए गए तो दुकान में काम करने वाली लड़कियों से छेड़छाड़ का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। “जेल भिजवा देंगे”—इस तरह की धमकियों से गरीब मजदूर दहशत में जी रहा है।
पीड़ित का कहना है कि वह हर समय किसी अनहोनी की आशंका में रहता है। “मैं गरीब हूं, मेरे पास न पैसा है न ताकत। बस अपने परिवार को बचाना चाहता हूं,”—यह कहते हुए उसकी आवाज कांप जाती है।

मामले से आहत पीड़ित ने SSP बरेली को प्रार्थना पत्र सौंपकर पूरी दास्तान बयां की, जिस पर SSP ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह जांच गरीब को वास्तविक न्याय दिला पाएगी या फिर फाइलों में सिमटकर रह जाएगी।
यह मामला सिर्फ एक ठेले वाले का नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब मजदूरों की सच्चाई है जो फुटपाथ पर मेहनत करके पेट पालते हैं, लेकिन दबंगों की रंगदारी और धमकियों से रोज़ जूझते हैं। सवाल साफ है—
क्या फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वालों की जिंदगी दबंगों की बपौती बन चुकी है?
क्या कानून और प्रशासन ऐसे शोषकों पर लगाम लगाएगा?
प्रशासन से मांग की जा रही है कि जांच को तेजी से पूरा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब की आवाज दबने न पाए और शोषण की यह काली कहानी यहीं खत्म हो।