वृन्दावन में फर्जी होटल वेबसाइटों का जाल, कमरे की बुकिंग के नाम पर श्रद्धालुओं से ठगी
वृन्दावन में प्रसिद्ध होटलों और आश्रमों के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर श्रद्धालुओं से कमरे की बुकिंग के नाम पर एडवांस रकम ऐंठने वाले साइबर ठग सक्रिय।
कान्हा की नगरी वृन्दावन में साइबर ठगों ने प्रसिद्ध होटलों और आश्रमों के नाम से बनाई फर्जी वेबसाइटें।
ऑनलाइन एडवांस बुकिंग कराकर दूर-दराज से सामान लेकर पहुँचने वाले निर्दोष श्रद्धालु हो रहे ठगी का शिकार।
मथुरा पुलिस और साइबर सेल के पास हर महीने आ रही हैं होटल बुकिंग से जुड़ी तीन से चार गंभीर शिकायतें।
स्थानीय थानों में सुनवाई न होने और क्षेत्राधिकार के बहाने लौटाए जाने के कारण कई लोग नहीं दर्ज कराते मामला।
श्याम बिहारी भार्गव/ जन माध्यम
मथुरा । कान्हा की नगरी में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु विभिन्न प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं की इसी भारी भीड़ और उनकी सहूलियत को देखते हुए साइबर ठगों ने अब वृंदावन के प्रसिद्ध होटलों और आश्रमों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पवित्र नगरी में फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से होटलों के कमरे बुक करने के नाम पर श्रद्धालुओं से मोटी रकम ऐंठने का एक बड़ा खेल चल रहा है।
बाहर से आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा को सुगम बनाने के लिए गूगल पर मथुरा-वृंदावन के होटल और आश्रम सर्च करके ऑनलाइन कमरे की बुकिंग करते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को भांपकर साइबर अपराधियों ने इंटरनेट पर नामचीन होटलों के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइटें सक्रिय कर रखी हैं। अज्ञानता वश श्रद्धालु इन फर्जी साइटों पर दिए गए मोबाइल नंबरों पर बात करके एडवांस रकम ट्रांसफर कर देते हैं। लेकिन जब वे अपना सामान लेकर सीधे होटल के रिसेप्शन पर पहुंचते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि उनके नाम से कोई कमरा बुक ही नहीं है और वे ठगी का शिकार हो चुके हैं।
वृंदावन पुलिस और जिला साइबर सेल के पास हर महीने ऐसी तीन से चार लिखित शिकायतें पहुंच रही हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा इन फर्जी वेबसाइटों को चिन्हित कर लगातार ब्लॉक भी कराया जा रहा है। इसके बावजूद ठगों का नेटवर्क नए-नए लिंक बनाकर श्रद्धालुओं को अपनी ठगी का शिकार बना रहा है, जिससे कान्हा की नगरी में आने वाले यात्रियों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि बड़ी संख्या में पीड़ित श्रद्धालु ठगी का शिकार होने के बावजूद थानों में औपचारिक शिकायत दर्ज ही नहीं कराते हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि कोई पीड़ित बाहरी राज्य का नागरिक थाने पहुंचता भी है, तो पुलिस अक्सर ऑनलाइन भुगतान करने का बैंक क्षेत्र (प्रशासनिक क्षेत्राधिकार) दूसरा बताकर उन्हें वापस लौटा देती है। स्थानीय स्तर पर उचित सुनवाई न होने और ठगी गई रकम छोटी होने के कारण श्रद्धालु कानूनी कार्रवाई के चक्कर काटने के बजाय चुपचाप वापस लौटना बेहतर समझते हैं, जिससे इन शातिर अपराधियों के हौसले और अधिक बुलंद हो रहे हैं।