आयुष्मान योजना में लूट पर सख्ती, मंडलायुक्त का अल्टीमेटम

बरेली में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर लूट और लापरवाही के मामलों पर मंडलायुक्त ने सख्त चेतावनी दी। कई निजी अस्पतालों पर कार्रवाई।

आयुष्मान योजना में लूट पर सख्ती, मंडलायुक्त का अल्टीमेटम
AI द्वारा काल्पनिक फोटो
HIGHLIGHTS:

फर्जी कार्ड और वसूली के कई मामले उजागर

निजी अस्पतालों पर कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट प्रक्रिया

मंडलायुक्त का सख्त अल्टीमेटम

फर्जी गैंग का भी हुआ खुलासा

हसीन दानिश । जन माध्यम

बरेली। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत गरीबों को मुफ्त इलाज का वादा अब लूट का जरिया बनता जा रहा है। निजी अस्पतालों में फर्जी कार्ड बनाकर सरकारी धन की हेराफेरी, आयुष्मान कार्डधारकों से जबरन पैसे वसूलने, एक्सपायर्ड दवाएं देने और फर्जी आईसीयू एडमिशन जैसे गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की जांच में कई अस्पतालों पर कार्रवाई हो चुकी है, फिर भी लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही। मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने बुधवार को विकास भवन सभागार में हुई मंडलीय समीक्षा बैठक में साफ चेतावनी दी कि किसी भी अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारक से एक पैसा भी वसूला गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “योजना गरीबों के हक की है। इसे लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” 

पिछले कुछ महीनों में बरेली में आयुष्मान घोटाले के कई बड़े मामले सामने आए हैं। दिसंबर 2025 में साचीज की जांच में चार निजी अस्पताल राधिका मैटरनिटी हॉस्पिटल,मेट्रो विजन हॉस्पिटल,उम्मीद हॉस्पिटल और अरबन हॉस्पिटल में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर सरकारी पैसों की लूट का खुलासा हुआ था। इन अस्पतालों को सस्पेंड कर दिया गया और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।  
फरवरी 2026 में स्टेडियम रोड स्थित तीन निजी अस्पतालों में आयुष्मान की आड़ में वसूली का जाल पकड़ा गया। यहां एक्सपायर्ड दवाएं देने, फर्जी आईसीयू एडमिशन और कैश वसूली के आरोप लगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन अस्पतालों के खिलाफ नोटिस जारी किया।इसी तरह सनराइज हॉस्पिटल पर भी आयुष्मान मरीजों से पैसे वसूलने और इलाज में लापरवाही का आरोप लगा। दिसंबर 2025 में एक मरीज की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन पर एफआईआर दर्ज कराई गई और कार्रवाई की सिफारिश की गई। गंगाचरण हॉस्पिटल में भी एक महिला से 13,324 रुपये जबरन वसूले जाने का मामला स्थायी लोक अदालत तक पहुंचा, जहां अस्पताल निदेशक और मैनेजर को नोटिस जारी किया गया।हाल ही में पुलिस ने फर्जी आधार, आयुष्मान कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले एक संगठित गैंग का भंडाफोड़ किया। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लैपटॉप, स्कैनर और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। इस गैंग का बरेली और आसपास के जिलों में नेटवर्क था।आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलना चाहिए। लेकिन बरेली के कई निजी अस्पताल आयुष्मान कार्डधारकों को भर्ती तो करते हैं, मगर इलाज के नाम पर सरकारी पैसे वसूलने के साथ-साथ मरीजों से भी अतिरिक्त पैसे ऐंठते हैं। फर्जी बिल, बिना इलाज के क्लेम और गैर-जरूरी टेस्ट कराने जैसे तरीके अपनाए जा रहे हैं।  
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि साचीज की टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है और ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार की जा रही है जिन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मंडलायुक्त ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज पूरी पारदर्शिता से किया जाए और कोई भी वसूली न हो।आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को लूट का साधन बनाने वाले अस्पतालों और उनके संरक्षकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई जरूरी है। यदि आप या आपके किसी परिचित ने आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज में लापरवाही या वसूली का शिकार होने का अनुभव किया हो तो तुरंत जन माध्यम को सूचित करें। हमारी टीम इसकी जांच कराएगी और दोषियों तक पहुंचाएगी।