सरकारी परिसर में नीला झंडा लहराने से उठे गंभीर सवाल

बरेली के शाही क्षेत्र के फिरोजपुर गांव में सचिवालय और प्राथमिक विद्यालय परिसर में नीला झंडा फहराने का मामला सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने झंडा हटवाया और जांच शुरू की।

सरकारी परिसर में नीला झंडा लहराने से उठे गंभीर सवाल
HIGHLIGHTS:

सरकारी परिसर में एक सप्ताह तक लहराता रहा झंडा

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची

ग्रामीणों ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया

प्रशासन ने जांच शुरू कर जिम्मेदारी तय करने की बात कही

जन माध्यम
शाही।बरेली।
गांव के बीच खड़े सरकारी भवनों पर जब नियमों से हटकर कुछ नजर आता है तो यह सिर्फ एक झंडा नहीं होता, बल्कि व्यवस्था पर उठता हुआ एक बड़ा सवाल बन जाता है।

शाही क्षेत्र के फिरोजपुर गांव में सचिवालय और प्राथमिक विद्यालय परिसर में डॉ भीमराव अंबेडकर से संबंधित नीला झंडा लगाए जाने का मामला सामने आया है। यह झंडा करीब एक सप्ताह तक वहीं लहराता रहा और इस दौरान दोनों परिसर नियमित रूप से खुले रहे।

बताया जा रहा है कि झंडा लगे होने का वीडियो वायरल होने के बाद गांव में हलचल मच गई और पुलिस मौके पर पहुंची। सबसे गंभीर बात यह रही कि इतने दिनों तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी की नजर इस पर नहीं पड़ी, जिससे प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी परिसरों में केवल भारतीय तिरंगा ही फहराया जा सकता है और अन्य किसी भी प्रकार के झंडे का लगाया जाना नियमों के विरुद्ध है। वहीं ग्राम प्रधान पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह कदम स्थानीय सामाजिक समीकरण और वोट बैंक की राजनीति को ध्यान में रखकर उठाया गया, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सचिव और प्रधानाध्यापक की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उनकी निगरानी में यह स्थिति कई दिनों तक कैसे बनी रही। विवाद बढ़ने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर झंडा हटवा दिया।

ग्राम पंचायत सचिव गजेंद्र ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी और जानकारी मिलने पर झंडा उतरवा दिया गया। वहीं प्रधानाध्यापक पूनम देवी से संपर्क नहीं हो सका। ग्राम प्रधान सलीम मंसूरी ने बताया कि 14 अप्रैल को झंडा लगाया गया था, जिसकी उन्हें जानकारी नहीं थी और अब इसे हटा दिया गया है।

प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।