सिम ने खोले साइबर अपराध के दरवाज़े

शाही पुलिस ने साइबर अपराध नियंत्रण अभियान के तहत 52 हजार रुपये की ठगी में इस्तेमाल सिम बेचने वाले विक्रेता पर मुकदमा दर्ज किया है। फर्जी सिम बिक्री और पोर्टिंग का मामला सामने आया है।

सिम ने खोले साइबर अपराध के दरवाज़े
HIGHLIGHTS:

➡️ शाही पुलिस की साइबर अपराध पर बड़ी कार्रवाई
➡️ 52 हजार की साइबर ठगी में इस्तेमाल हुई सिम
➡️ सिम बेचने वाले पॉइंट ऑफ सेल संचालक पर मुकदमा
➡️ साप्ताहिक बाजार में कैंप लगाकर होती थी सिम बिक्री
➡️ फर्जी व्यक्ति के नाम जारी की गई थी सिम
➡️ साइबर सेल की जांच में हुआ खुलासा
➡️ अन्य सिम विक्रेताओं की भी जांच जारी

जन माध्यम।

दीनानाथ कश्यप। शाही (बरेली)।
डिजिटल युग में जब अपराध उंगलियों की एक क्लिक से अंजाम दिए जाने लगे हैं, तब कानून की जिम्मेदारी और भी भारी हो जाती है। शाही पुलिस ने साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया है, जहां एक सिम ने धोखाधड़ी की पूरी कहानी बयां कर दी।

साइबर अपराध नियंत्रण अभियान के अंतर्गत शाही पुलिस ने एक सिम विक्रेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिसके पॉइंट ऑफ सेल से बेची गई सिम का इस्तेमाल 52 हजार रुपये की साइबर ठगी में किया गया था। यह कार्रवाई साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस की सतर्कता और सख्ती को दर्शाती है।

थानाध्यक्ष राजेश बैसला ने बताया कि मंगलवार को अभियान के दौरान साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार द्वारा एक सिम पॉइंट ऑफ सेल संचालक से पूछताछ की गई। पूछताछ में सामने आया कि जिस सिम को उसने बेचा था, उसी सिम के माध्यम से साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया गया। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि यह पॉइंट ऑफ सेल काशीपुर शाही निवासी सुरज पाल पुत्र ईश्वरी प्रसाद का है, जो साप्ताहिक बाजारों में कैंप लगाकर सिम पोर्ट और सिम बिक्री का कार्य करता था। उसके पॉइंट से बेची गई सिम आईडी कोड 242660138 का उपयोग 52 हजार रुपये की धोखाधड़ी में किया गया।

साइबर सेल प्रभारी प्रवीण कुमार के अनुसार साइबर क्राइम से प्राप्त एक सूची के आधार पर जांच में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2021 में यह सिम एक फर्जी व्यक्ति को बेची गई थी। उसी सिम का उपयोग कर साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। ठगी के बाद आरोपी ने सिम को तोड़ दिया, जिसके पश्चात दिल्ली में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसी सिम को दोबारा जारी कर लिया गया।

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और साइबर अपराध से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। थानाध्यक्ष राजेश बैसला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि साइबर अपराधों को रोकने के लिए पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर अपराधों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जाएगा।

पुलिस के अनुसार इस अभियान के तहत कई अन्य पॉइंट ऑफ सेल भी जांच के दायरे में हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में साइबर अपराध से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।

डिजिटल दुनिया में अपराध चाहे जितना आधुनिक हो जाए, कानून की नजर उससे कहीं ज्यादा सतर्क है—शाही पुलिस की यह कार्रवाई उसी का प्रमाण है।