चिंता : नए साल के जश्न ने बढ़ाया AQI, दुनिया के 100 प्रदूषित शहरों में बरेली 50 वें स्थान पर, बुजुर्ग और बच्चों का रखें ख्याल
साल के जश्न ने जहां हर जगह खुशियां बिखेरीं,तो वहीं पर्यावरण पर इसका गंभीर असर पड़ा। क्योंकि, आतिशबाजी, गाड़ियों की आवाजाही और ठंड के मौसम में हवा में मौजूद प्रदूषकों ने वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है।
बरेली। साल के जश्न ने जहां हर जगह खुशियां बिखेरीं,तो वहीं पर्यावरण पर इसका गंभीर असर पड़ा। क्योंकि, आतिशबाजी, गाड़ियों की आवाजाही और ठंड के मौसम में हवा में मौजूद प्रदूषकों ने वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। हालांकि, बरेली प्रदूषण को लेकर सुर्खियों में नहीं रहता। मगर, अब दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में 50वें स्थान पर आ गया है। यह स्थिति चिंताजनक है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए। बुधवार सुबह बरेली का एक्यूआई 300 से अधिक दर्ज किया गया। शहर के सिविल लाइंस के हालात सबसे अधिक चिंतनीय हैं। यहां का एक्यूआई 302, राजेंद्र नगर का 293, और सुभाषनगर क्षेत्र का 283 था। जिसके चलते लोगों की सेहत खराब होने लगी है। इसके साथ ही यूपी के पीलीभीत का एक्यूआई 280 और सहारनपुर का 282 है। यह जिले भी सौ प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।
आतिशबाजी, धुएं और धूल ने बढ़ाया प्रदूषण
बरेली का एक्यूआई काफी बढ़ रहा है। मंगलवार आधी रात को बरेली का एक्यूआई 200 के करीब था। मगर, सुबह तक 300 के पार पहुंच गया। यह काफी चिंताजनक है। बरेली में नए साल पर आतिशबाजी, धूल, धुएं के साथ अलाव से एक्यूआई बढ़ गया है। ठंड के कारण लोग घर से लेकर खुली जगह में अलाव जला रहे हैं। इससे भी प्रदूषण बढ़ रहा है। हालांकि, हर इंसान को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसकी कमी से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है। सांस लेने वाली हवा का ऑक्सीजन स्तर 19.5 प्रतिशत होना चाहिए। इसके नीचे जाने से नुकसान होता है।
बच्चों और बुजुर्गों को मास्क लगाकर घर से निकलने की सलाह
एक्यूआई बढ़ने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों की सेहत पर काफी असर पड़ रहा है। ऐसे में घरों से निकलने में एहतियात बरतने की जरूरत है। लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है। डॉक्टर एन-95 मास्क लगाकर घर से निकलने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि, बरेली में सांस के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। हालांकि, 0 से 50 एक्यूआई काफी अच्छा माना जाता है। इससे सेहत पर कोई असर नहीं होता।51-100 एक्यूआई भी ठीक है, लेकिन संवेदनशील लोगों को सांस की हल्की दिक्कत हो सकती है। 101 के बाद ठीक नहीं है। 101 से 200 एक्यूआई से फेफड़ा, दिल और अस्थमा मरीजों को सांस में दिक्कत होती है। 201 से 300 के बीच एक्यूआई काफी खराब है। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर किसी को भी सांस में दिक्कत होना तय है। 301 से 400 एक्यूआई बहुत खराब है। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर सांस की बीमारी का खतरा होता है, जबकि 401से 500 एक्यूआई सबसे अधिक खतरनाक है। इंसान की सेहत पर सबसे अधिक खराब होती है।
इनके सबसे अधिक नुकसानदेह
वायु प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। शहर के प्रमुख फिजिशियन डॉ.नदीम का कहना है कि लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेने से सांस की समस्याएं,एलर्जी, खांसी, और अस्थमा होने का खतरा है। यह इम्यून सिस्टम कमजोर करता है। प्रदूषित हवा से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पुरानी बीमारियां जैसे ब्रॉन्काइटिस और सीओपीडी (COPD) बढ़ता है। इसके साथ ही आंखों में जलन, गले में खराश, सिरदर्द और थकावट होती है।