महिला आरक्षण पर बरेली में संगठनों के बीच टकराव
बरेली में महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रदर्शन के बाद दो संगठनों के बीच विवाद गहराया सबका हक ऑर्गेनाइजेशन ने निदा खान के प्रदर्शन पर सवाल उठाए
महिला आरक्षण पर बरेली में बढ़ा विवाद
पुतला दहन के बाद संगठनों में टकराव
सबका हक ऑर्गेनाइजेशन ने जताया विरोध
महिलाओं के मुद्दों पर सियासी बहस तेज
जन माध्यम
बरेली। जब महिलाओं के अधिकारों की बात सड़कों पर उतरती है तो आवाजें सिर्फ नारे नहीं रह जातीं बल्कि बहस का रूप ले लेती हैं। महिला आरक्षण बिल को लेकर शहर में ऐसा ही सियासी टकराव सामने आया है।
आला हजरत वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान द्वारा चौकी चौराहा पर किए गए प्रदर्शन और विपक्षी पार्टियों का पुतला दहन करने के बाद सबका हक ऑर्गेनाइजेशन ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। निदा खान ने कुछ महिलाओं के साथ प्रदर्शन करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा था।
इस मामले में सबका हक ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष राफिया शबनम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रदर्शन को दिखावा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम सरकार और मीडिया को खुश करने के उद्देश्य से उठाया गया है और इसका महिलाओं के वास्तविक मुद्दों से कोई सीधा संबंध नहीं है।
राफिया शबनम ने कहा कि देश की सभी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मूल महिला आरक्षण बिल को संसद द्वारा पहले ही पारित किया जा चुका है और इसे लागू करने की अधिसूचना भी जारी हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि विवाद एक अन्य संशोधन प्रस्ताव को लेकर था, जिसमें सीटों के परिसीमन से जुड़े प्रावधान शामिल थे और जिसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।
इस पूरे घटनाक्रम को संगठन ने राजनीतिक स्टंट करार दिया है। वहीं दोनों पक्षों के बीच यह विवाद अब मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण के मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर बहस को और तेज कर रहा है।