मतदाता सूची पर पैनी नज़र, कमिश्नर
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कमिश्नर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक, पात्र मतदाता का नाम न कटने का आश्वासन।
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जन माध्यम
बरेली। चुनावी राजनीति से दूर, लेकिन लोकतंत्र के सबसे अहम दस्तावेज़ मतदाता सूची को लेकर गुरुवार को गंभीर और साफ़ सुथरी पहल देखने को मिली। कलेक्ट्रेट सभागार में कमिश्नर एवं रोल प्रेक्षक भूपेन्द्र एस.चौधरी की अध्यक्षता में विधानसभा निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण की समीक्षा बैठक हुई, जिसमें प्रशासन ने दो टूक संदेश दिया न नाम गलत जुड़ेगा, न कोई पात्र मतदाता छूटेगा।
बैठक का मकसद सिर्फ़ आंकड़ों की समीक्षा नहीं था, बल्कि यह परखना था कि राजनैतिक दलों, निर्वाचन अधिकारियों और प्रशासन के बीच संवाद ज़मीन पर कितना मजबूत है। कमिश्नर ने कहा कि समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि आपसी समन्वय बना हुआ है और यही निष्पक्ष मतदाता सूची की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से हटाया नहीं जाएगा। राजनैतिक दलों ने बूथ स्तर पर हो रहे संशोधन कार्यों की जानकारी नियमित रूप से साझा करने की मांग रखी। फार्म 6, 7 और 8 की बूथवार स्थिति जानने की इच्छा जताई गई, ताकि वे भी अपने स्तर पर निगरानी कर सकें। डीएम एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश सिंह ने स्पष्ट किया कि पूरा पुनरीक्षण कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है और किसी भी जानकारी को छिपाया नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि एएसडी श्रेणी में छूटे मतदाता और 1 जनवरी तक 18 वर्ष पूरे करने वाले नवयुवाओं के पंजीकरण पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 16 दिसंबर 2025 तक राजनैतिक दलों के साथ 27 बैठकें हो चुकी हैं, जबकि जिला स्तर पर पांच समन्वय बैठकें आयोजित की गईं। एएसडी सूची सभी दलों को पहले ही सौंप दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि दावा और आपत्ति 6 फरवरी तक ली जाएंगी, जबकि जारी नोटिसों की सुनवाई 27 फरवरी तक होगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 133 एईआरओ की तैनाती की गई है और अब तक 1 लाख 78 हजार से अधिक नोटिस तामिल कराए जा चुके हैं। अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी की जाएगी।
बैठक में यह भी सामने आया कि निर्वाचन आयोग से 3 लाख 58 हजार से अधिक त्रुटिपूर्ण डाटा प्राप्त हुआ है, जिसमें एक ही व्यक्ति से कई नामों की मैपिंग, नाम व आयु संबंधी विसंगतियां शामिल हैं। इन मामलों की सुनवाई के लिए 34 अतिरिक्त एईआरओ नियुक्त किए जाएंगे। बैठक में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि मतदाता सूची सिर्फ़ काग़ज़ी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जिम्मेदारी है और इस जिम्मेदारी से कोई समझौता नहीं होगा।