झोलाछाप की दरिंदगी, सिस्टम की चुप्पी
बरेली में झोलाछाप डॉक्टर की घोर लापरवाही से युवक अपंग हो गया। क्लीनिक सील होने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहा है, जबकि नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
➡️ झोलाछाप डॉक्टर ने गलत ऑपरेशन कर युवक को किया अपंग
➡️ आंत की बीमारी को अंडकोष समझकर की सर्जरी
➡️ इलाज के नाम पर 32 हजार से अधिक की ठगी
हसीन दानिश / जनमाध्यम
बरेली। एक गरीब पिता का दिल रो रहा है, उसकी आंखें सूजी हुई हैं, और आवाज में गुस्सा फूट रहा है। शिशुपाल पुत्र लेखराज, ग्राम डोहरा गौटिया, थाना बारादरी के निवासी – उनका इकलौता बेटा अजय आज बिस्तर पर पड़ा तड़प रहा है। एक झोलाछाप फर्जी डॉक्टर जय वीर ने आंत की बीमारी को अंडकोष समझकर गलत ऑपरेशन कर दिया। गलत नस काटी, खून बहता रहा, बेटा अपंग हो गया। लेकिन सबसे ज्यादा शर्मनाक है स्वास्थ्य विभाग और नोडल अधिकारी की घोर लापरवाही – जो क्लीनिक सील करके सो गए हैं, जबकि आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहा है। दिसंबर 2025 में अजय को पेट दर्द हुआ। पिता ने सनराइज कॉलोनी के पास 'प्रथ्वी फार्मा क्लीनिक' पर ले जाकर जय वीर से दिखाया। खुद को डॉक्टर बताने वाले इस झोलाछाप ने रिपोर्ट देखकर झूठा भरोसा दिया कि "पेशाब की जगह में पानी है मामूली चीरा लगाकर निकाल दूंगा, मैंने सैकड़ों मरीज ठीक किए हैं।" विश्वास में आकर शिशुपाल ने 20,000 रुपये दिए। 6 दिसंबर को ही गंदे कमरे में ऑपरेशन हो गया। 25 दिनों तक रोज पट्टी बदलने के नाम पर 500 रुपये वसूले – कुल 32,500 रुपये से ज्यादा ठग लिए। लेकिन हालत बिगड़ती गई। खून रुकने का नाम नहीं, अजय कमजोर होता गया, अब चल भी नहीं पाता। पीजीआई लखनऊ में डॉक्टरों ने सिर पकड़ लिया – "आंत में बीमारी थी, आपने अंडकोष का ऑपरेशन करवा दिया? यह घातक लापरवाही है, अब भर्ती भी मुश्किल है। "शहर के तमाम डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया। जांच में खुलासा जय वीर कोई एमबीबीएस, कोई डिग्री, कोई रजिस्ट्रेशन वाला डॉक्टर नहीं – बस एक खतरनाक झोलाछाप! जब शिशुपाल ने शिकायत की तो गालियां दीं, धमकाया – "दोबारा आया तो फर्जी केस ठोक दूंगा, जेल में सड़वा दूंगा"
पीड़ित पिता ने सीएमओ कार्यालय में शिकायत की। नोडल अधिकारी ने 'गोपनीय' तरीके से क्लीनिक सील तो कर दिया – लेकिन बस इतना ही? आरोपी के खिलाफ कोई विभागीय जांच, कोई एफआईआर की सिफारिश, कोई सख्त कार्रवाई नहीं! मजबूरन 19 जनवरी 2026 को शिशुपाल ने बारादरी थाने में तहरीर दी, पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से आज तक कोई रिपोर्ट नहीं आई। नोडल अधिकारी कहां सो रहे हैं? क्या सील करके कर्तव्य पूरा मान लिया? क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं?शिशुपाल गुस्से में चीखते हैं – "मेरा बेटा जिंदगी भर अपंग रहेगा। मैंने हजारों रुपये दिए, मिला सिर्फ धोखा, दर्द और अपमान। झोलाछाप खुलेआम घूम रहा है, और स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूट रही! नोडल अधिकारी साहब, क्लीनिक सील करके तसल्ली हो गई? आरोपी को संरक्षण क्यों? क्या आपकी कुर्सी बचाने के लिए मासूम की जिंदगी दांव पर लगी है? क्या बरेली में झोलाछापों को फ्री हैंड मिला हुआ है?"यह सिर्फ एक परिवार की तबाही नहीं – पूरे स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी है। नोडल अधिकारी और सीएमओ की लापरवाही से सवाल उठ रहे हैं – झोलाछापों पर कार्रवाई कब? ऐसे फर्जी डॉक्टरों को सजा कब? क्या प्रशासन इस बेटे के पिता को न्याय दिलाएगा, या यह पुकार भी दबा दी जाएगी?