भारतीय शिक्षा बोर्ड का नया विज़न

डॉ. एनपी सिंह ने बताया – भारतीय शिक्षा बोर्ड वेद, गीता, 120 नायकों की गाथा पढ़ाएगा, NEET-UPSC की तैयारी के साथ संस्कार देगा।

भारतीय शिक्षा बोर्ड का नया विज़न
HIGHLIGHTS:

➡️ भारतीय शिक्षा बोर्ड: वेद, गीता, उपनिषद आधारित सिलेबस
➡️ 120 भारतीय नायकों, नायिकाओं की गाथाएँ पाठ्यक्रम में
➡️ आधुनिकता, भारतीयता, संस्कार और नेतृत्व का समन्वय
➡️ NEET, JEE, UPSC की तैयारी के साथ संस्कार
➡️ डॉ. एनपी सिंह (रिटा. IAS): शिक्षा जीवन निर्माण का माध्यम
➡️ डीएम अविनाश सिंह: संस्कारों की नींव बचपन में पड़ती है

डॉ. एन.पी. सिंह बोले आधुनिकता संग भारतीयता का समन्वय

जन माध्यम 
बरेली।
भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य भारतीय आत्मा से जुड़ी उस शिक्षा परंपरा को पुनर्जीवित करना है, जो चरित्र, आत्मगौरव और सांस्कृतिक वैभव पर आधारित रही है। जीआईसी ऑडिटोरियम में आयोजित संगोष्ठी में बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. एन.पी. सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप स्थापित यह बोर्ड आधुनिक शिक्षा को भारतीय चिंतन, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों के साथ जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे जीवन निर्माण, नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक चेतना विकसित करनी चाहिए। डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और देशभर के सैकड़ों विद्यालय इससे जुड़ चुके हैं। इसके पाठ्यक्रम में वेद, उपनिषद, गीता, जैन-बौद्ध दर्शन, संवैधानिक मूल्य, गुरुकुल पद्धति और आधुनिक तकनीकी शिक्षा का सुंदर समन्वय है। छोटे बच्चों को कहानियों कविताओं के माध्यम से भारतीय दर्शन से परिचित कराया जाएगा, जबकि उच्च कक्षाओं में विस्तृत अध्याय पढ़ाए जाएंगे। नवमीं कक्षा में वेदांत दर्शन का समावेश इसका उदाहरण है। इसके साथ ही लगभग 120 भारतीय नायकों-नायिकाओं की गाथाएँ भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगी। डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि संस्कारों की नींव बचपन में पड़ती है। भारतीय शिक्षा बोर्ड की लचीली शिक्षा प्रणाली आलोचनात्मक सोच, अनुभवात्मक ज्ञान और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देती है। यह मॉडल बच्चों को भारतीय मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ UPSC, JEE, NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार करता है।उन्होंने कहा कि यह शिक्षा पद्धति आधुनिक विज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति का सेतु बनेगी। अपने उद्बोधन में डीएम अविनाश सिंह ने राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा
अधर्म को मूक बनकर जो मात्र निहारे जाते हैं,भीष्म हों या द्रोण अंत में सब मारे जाते हैं।