जमीन माफिया का हाई-फाई खेल, मरे हुए भी बेच रहे प्लॉट, अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों की हेराफेरी

जमीन माफिया का हाई-फाई खेल, मरे हुए भी बेच रहे प्लॉट, अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों की हेराफेरी
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बरेली। शहर में जमीन के खेल में नए-नए पैंतरे देखने को मिल रहे हैं। यहां एक शातिर गिरोह ने तो हद ही पार कर दी। अब वो जमीन बेचने के लिए किसी जिंदा मालिक की भी ज़रूरत नहीं समझते। अगर आप सोच रहे हैं कि जमीन खरीदने-बेचने के लिए जिंदा होना ज़रूरी है तो इस गिरोह ने आपकी सोच को गलत साबित कर दिया है।

वीर सावरकर नगर के गायत्रीपुरी निवासी सुमित सक्सेना ने डीएम रविंद्र कुमार से मिलकर एक सनसनीखेज खुलासा किया। उनके मुताबिक शहर में एक गिरोह ऐसा काम कर रहा है जो लावारिस प्लॉटों के फर्जी कागजात बनवाकर उन्हें बेच देता है। मज़े की बात ये है कि इसमें सरकारी कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। गिरोह का मास्टरमाइंड पीलीभीत रोड की एक कॉलोनी में रहता है और इससे पहले भी कई लोगों को लाखों का चूना लगा चुका है। 2023 में इज्जतनगर और 2024 में फिरोजाबाद में इसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। जेल भी गया था, लेकिन ठगी का खेल नहीं रुका।

गिरोह का दूसरा खिलाड़ी बदायूं रोड पर रहता है और दोनों मिलकर शहर के सबसे महंगे इलाकों में लोगों को फर्जी प्लॉट बेच रहे हैं।सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पता चला कि ये खेल कोई नया नहीं, बल्कि 2018 से ही चल रहा था। गिरोह ने सिविल लाइंस के बिहारीपुर में करोड़ों की जमीन के फर्जी कागजात बनवाए। उप निबंधक कार्यालय द्वितीय से 9 जनवरी 2018 को इन कागजों की सत्यापित कॉपी भी मिल गई। जिस पर बाकायदा सरकारी हस्ताक्षर थे। फिर क्या था? 22 जुलाई 2024 को उसी कागज के आधार पर जमीन बेच दी गई।

डीएम ने बनाई जांच कमेटी

डीएम रविंद्र कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीएम फाइनेंस और एआईजी स्टांप की दो सदस्यीय टीम गठित की है।