कलम और प्रशासन का मिला संगम

बरेली में डीआईजी अजय सहानी, मेयर उमेश गौतम और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में मीडिया-प्रशासन संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। भरोसे और जिम्मेदारी पर जोर।

कलम और प्रशासन का मिला संगम
HIGHLIGHTS:

डीआईजी, मेयर और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी

मीडिया और प्रशासन के बीच खुला संवाद

कानून व्यवस्था और विकास पर चर्चा

भरोसे और जिम्मेदारी पर जोर

जन माध्यम 
बरेली।
मिशन अस्पताल स्थित एक मीडिया हाउस में आयोजित कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब सत्ता और सवाल आमने सामने बैठते हैं, तो दूरी खुद ब खुद कम हो जाती है। डीआईजी अजय सहानी, मेयर डॉ. उमेश गौतम और सीओ आशुतोष शिवम की मौजूदगी में यह आयोजन महज औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और जिम्मेदारी का उदाहरण बन गया। वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया कर्मियों ने अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। गुलदस्तों के साथ हुए इस सम्मान में केवल परंपरा नहीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थी जो मीडिया और प्रशासन के बीच समाज के हित में लगातार बनता और मजबूत होता है। कार्यक्रम में विनय कुमार शर्मा, दीपक शर्मा, शिव शर्मा, संजय शर्मा, कृष्णा चौधरी और नीरज आनंद जैसे वरिष्ठ पत्रकारों की सक्रिय उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में डीआईजी अजय सहानी ने बेहद सटीक शब्दों में मीडिया की भूमिका को परिभाषित करते हुए कहा कि “मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच भरोसे की सबसे मजबूत कड़ी है।” उन्होंने माना कि कई बार हालात ऐसे बनते हैं, जब जनता की आवाज सीधे प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती, ऐसे में मीडिया ही वह मंच बनता है जो सच को सामने लाकर जवाबदेही तय करता है। कानून व्यवस्था पर बोलते हुए डीआईजी ने दो टूक कहा कि पुलिस की मजबूती केवल वर्दी से नहीं, बल्कि जनता के सहयोग से तय होती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जनसहभागिता और पारदर्शी संवाद बेहद जरूरी है।
मेयर डॉ. उमेश गौतम ने शहर के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि नगर निगम की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका निर्णायक है। वहीं सीओ आशुतोष शिवम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की तैयारियों और रणनीतियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सबसे अहम पहलू रहा खुला संवाद, जहां पत्रकारों ने बेबाक सवाल उठाए और अधिकारियों ने स्पष्ट जवाब दिए। इस संवाद ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ा समाधान है। कुल मिलाकर, यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह एहसास कराने वाला क्षण बना कि जब प्रशासन और मीडिया एक मंच पर आते हैं, तो समाज की दिशा और दशा दोनों बदलने की ताकत पैदा होती है।