बरेली: निशुल्क कोचिंग से चमके ग्रामीण युवा, 35 से 40 छात्रों का अग्निवीर में चयन
बरेली में रेलवे कोच अजय कश्यप की निशुल्क कोचिंग से 35 से 40 आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण युवाओं का चयन भारतीय सेना में अग्निवीर के पद पर हुआ है। ट्रेनिंग पर रवानगी से पहले युवाओं ने कोच का सम्मान किया।
निशुल्क शिक्षा का कमाल: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और ग्रामीण अंचल के करीब 150 युवाओं में से 35 से 40 बच्चों ने अग्निवीर बनकर देश सेवा का टिकट पाया।
26 वर्षों का अटूट संकल्प: रेलवे कोच अजय कश्यप पिछले 26 वर्षों से बिना कोई फीस लिए युवाओं को सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और सीआईएसएफ के लिए निखार रहे हैं।
भावुक विदाई: जून माह के अंत में ट्रेनिंग सेंटर रवाना होने से पहले होनहारों ने अपने गुरु को माला पहनाकर व मिठाई खिलाकर आशीर्वाद लिया।
जन माध्यम
बरेली। कहते हैं कि यदि इरादे मजबूत हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो अभावों के बीच भी सफलता का इतिहास लिखा जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बरेली जनपद के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार युवाओं ने। रेलवे कोच अजय कश्यप के कुशल एवं निशुल्क मार्गदर्शन में इस वर्ष एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है, जहां दूर-दराज के क्षेत्रों से आए करीब 150 युवाओं के बैच में से 35 से 40 युवाओं का चयन भारतीय सेना में 'अग्निवीर' के पदों पर हुआ है।
इस शानदार सफलता के बाद सभी चयनित युवा इस महीने के अंत तक अपने-अपने निर्धारित सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों (ट्रेनिंग सेंटर्स) के लिए रवाना हो जाएंगे।
रवानगी से पहले गुरु को पहनाईं मालाएं, खिलाई मिठाई
सेना के कड़े ट्रेनिंग मोर्चे पर रवाना होने से पहले सभी चयनित जांबाज युवाओं ने बरेली स्पोर्ट्स स्टेडियम/ट्रेनिंग ग्राउंड पर एक सादे और भावुक कार्यक्रम में अपने मार्गदर्शक व कोच अजय कश्यप को फूलमालाओं से लाद दिया। युवाओं ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय गुरु की कड़ी मेहनत और नि:स्वार्थ त्याग को दिया।
तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि खेल मैदान की पृष्ठभूमि में नीले और सफेद रंग का ट्रैक सूट पहने रेलवे कोच अजय कश्यप के गले में ढेरों गेंदे के फूलों की मालाएं सजी हुई हैं। उनके आस-पास भारतीय सेना में नवनिर्वाचित अग्निवीर युवा बेहद गौरवान्वित और मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ खड़े हैं। एक युवा अपने हाथों से कोच साहब को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा करा रहा है। सभी युवाओं की शारीरिक सुदृढ़ता और उनके चेहरों की चमक कोच की 26 साल की खेल तपस्या को साफ बयां कर रही है।
किसी के सिर पर पिता का साया नहीं, तो कोई करता था प्राइवेट नौकरी
इस बैच से चयनित होने वाले युवाओं की पृष्ठभूमि बेहद संघर्षपूर्ण रही है। इनमें से कोई साधारण किसान परिवार का बेटा है, तो कोई घर का खर्च चलाने के लिए बेहद कम वेतन पर प्राइवेट नौकरी करने को मजबूर था। कई युवा ऐसे भी हैं जिनके सिर से बचपन में ही पिता का साया उठ चुका था। महंगी कोचिंग और फिजिकल एकेडमी की फीस देने में असमर्थ इन युवाओं के सपनों को कोच अजय कश्यप ने सहारा दिया और बिना एक रुपया लिए दिन-रात मैदान पर पसीना बहाकर इन्हें सेना की कठिन परीक्षा के काबिल बनाया।
26 वर्षों से देश सेवा के लिए युवाओं को निखार रहे हैं अजय कश्यप
कोच अजय कश्यप पिछले 26 वर्षों से लगातार बिना किसी व्यावसायिक लाभ के, केवल देश सेवा और समाज कल्याण के जज्बे के साथ जरूरतमंद युवाओं को निशुल्क शारीरिक व तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके इस निशुल्क अभियान का ही नतीजा है कि हर साल इस मैदान से तपकर निकलने वाले युवा न सिर्फ भारतीय सेना में अग्निवीर बन रहे हैं, बल्कि सीआरपीएफ सीआईएसएफ बीएसएफ और उत्तर प्रदेश पुलिस सहित विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय सशस्त्र बलों में चयनित होकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।
इन होनहारों के नामों से गूंजा मैदान
इस वर्ष देश का गौरव बढ़ाने वाले सफल अभ्यर्थियों में सत्यम, सौरभ, केशव, विशाल, सक्षम, करन, सुशांत सिंह, रुपिंदर गुर्जर, शिवम गंगवार, विवेक शर्मा, माधव, आदर्श सिंह, रूद्र, अमित, अंकित और वीरू सहित कई अन्य युवा शामिल हैं, जो अब देश की रक्षा के लिए सैन्य वर्दी धारण करेंगे। मैदान पर मौजूद वरिष्ठ खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने सभी चयनित अग्निवीरों की पीठ थपथपाई और उन्हें देश का नाम रोशन करने के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।