वृंदावन: एएसआई की रिपोर्ट से थमा बांके बिहारी कॉरिडोर का काम
वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर में एएसआई की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नया मोड़ आ गया है। हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने मंदिर के जर्जर होने के कारण कॉरिडोर निर्माण पर चिंता जताई है और नई जमीन की मांग की है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की जांच रिपोर्ट में मंदिर के जर्जर और कमजोर होने का खुलासा हुआ है, जिससे कॉरिडोर के लिए होने वाली तोड़फोड़ से मुख्य ढांचे को खतरा बढ़ गया है।
आगामी 25 अगस्त को होने वाली सुनवाई के दौरान सेवायत हिमांशु गोस्वामी समाज को साथ लेकर कॉरिडोर न बनाए जाने का पक्ष मजबूती से रखेंगे।
गोस्वामी समाज ने कॉरिडोर के बजाय नगर परिक्रमा मार्ग के अंदर 25 से 30 एकड़ जमीन मांगी है, जहां वे बिना सरकारी धन के स्वयं नया मंदिर बनाएंगे।
श्याम बिहारी भार्गव / जन माध्यम
मथुरा। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर, वृंदावन के प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण को लेकर एक नया और बड़ा कानूनी मोड़ सामने आ गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की बहुप्रतीक्षित जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद मंदिर के सेवायतों और प्राचीन ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं। श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाई पावर्ड प्रबंध कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने साफ कहा है कि एएसआई की रिपोर्ट के बाद अब वर्तमान स्थान पर कॉरिडोर का निर्माण व्यावहारिक और सुरक्षित नहीं रह गया है।
मामले की पेचीदगियों को उजागर करते हुए सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि मंदिर की तकनीकी जांच करने वाली दो बड़ी संस्थाओं की रिपोर्ट में भारी विरोधाभास देखने को मिला है। इससे पहले हाई पावर्ड कमेटी ने आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों से जो सर्वे कराया था, उसमें मंदिर के कमजोर या जर्जर होने की कोई बात सामने नहीं आई थी।
इसके विपरीत, एएसआई की जो नई जांच रिपोर्ट सामने आई है, उसमें स्पष्ट रूप से खुलासा किया गया है कि सदियों पुराना यह मूल मंदिर अंदरूनी रूप से काफी जर्जर और कमजोर हो चुका है। इस रिपोर्ट के आधार पर सेवायत समाज का तर्क है कि यदि कॉरिडोर बनाने के लिए कुंज गलियों और मंदिर के आसपास भारी तोड़फोड़ या भारी मशीनरी का उपयोग किया गया, तो बांकेबिहारी जी के मूल गर्भगृह और प्राचीन मंदिर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
जैसा कि मंदिर प्रशासन की कड़ियों को दर्शाते इस प्रस्तावित 3डी ले-आउट मानचित्र में देखा जा सकता है, सरकार की योजना एक विशाल निचले और ऊपरी तल का खुला मैदान, फव्वारा, जुगल घाट की ओर से प्रवेश द्वार और श्रद्धालुओं के बैठने का विशाल कॉरिडोर बनाने की है। लेकिन सेवायत इस भव्यता के पीछे छिपे खतरे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
आगामी 25 अगस्त को देश की सर्वोच्च अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान हिमांशु गोस्वामी पूरे ब्रजवासी समाज और सेवायतों को साथ लेकर इस कॉरिडोर योजना के विरोध में शपथ पत्र दाखिल करेंगे।
प्रबंध कमेटी के सदस्य ने सरकार के सामने एक वैकल्पिक और ठोस प्रस्ताव भी रखा है। उन्होंने मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार वृंदावन नगर के परिक्रमा मार्ग के भीतर करीब 25 से 30 एकड़ सुरक्षित भूमि आवंटित करे। इस नई भूमि पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी के एक अत्यंत भव्य और विशाल नवीन मंदिर का निर्माण स्वयं गोस्वामी समाज द्वारा कराया जाएगा।
उन्होंने यह भी पूरी तरह स्पष्ट किया कि इस नए मंदिर निर्माण में वे बांकेबिहारी मंदिर के सरकारी फंड या राजकोष की किसी भी धनराशि का उपयोग नहीं करेंगे, बल्कि अपने आराध्य के प्रति समर्पण भाव से समाज के सहयोग से इसे तैयार करेंगे।
इसी सिलसिले में कमेटी के एक अन्य सदस्य और सेवायत रजत गोस्वामी ने याद दिलाया कि इससे पहले कोविड काल के दौरान आईआईटी दिल्ली की टीम ने भी मंदिर को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए थे। उस समय मंदिर के ढांचे पर लटके भारी-भरकम लोहे की रेल लाइन के गार्डर और भारी टिनशेड को हटाकर, उसकी जगह हल्का फाइबर वेस्ट टिनशेड लगवाया गया था और फर्श की मरम्मत कराई गई थी।
फिलहाल, मंदिर के संरक्षण का कार्य धीमी गति से चल रहा है। इस पूरे विवाद और एएसआई की चौंकाने वाली सर्वे रिपोर्ट पर चर्चा करने के लिए श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाई पावर्ड प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने आगामी 16 तारीख को एक आपातकालीन और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की कानूनी रणनीति पर अंतिम मुहर लगेगी।