रिछा बीआरसी में खाली कुर्सियां, स्कूल चलो अभियान फेल

बरेली के रिछा बीआरसी केंद्र पर स्कूल चलो अभियान का कार्यक्रम नहीं हुआ, खाली पड़ी कुर्सियां, बीएसए ने बीईओ से मांगा जवाब।

रिछा बीआरसी में खाली कुर्सियां, स्कूल चलो अभियान फेल
HIGHLIGHTS:

रिछा बीआरसी केंद्र पर कार्यक्रम नहीं हुआ

मुख्यमंत्री के लाइव प्रसारण के निर्देश बेअसर

खाली कुर्सियों ने खोली व्यवस्था की पोल

बीएसए ने बीईओ से मांगा जवाब

जन माध्यम

देवरनियां। बरेली। बच्चों को स्कूल से जोड़ने का बड़ा अभियान शुरू हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। सवाल ये है क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई हैं?

शनिवार को प्रदेश में “स्कूल चलो अभियान” का आगाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से किया। निर्देश साफ थे हर बीआरसी केंद्र और विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित हो, जनप्रतिनिधियों को बुलाया जाए और लाइव प्रसारण दिखाया जाए। लेकिन रिछा ब्लॉक संसाधन केंद्र (दमखोदा) में जो नजारा सामने आया, उसने जिम्मेदारों की गंभीर लापरवाही उजागर कर दी।

“जन माध्यम” की लाइव पड़ताल में सुबह करीब 10 बजे बीआरसी केंद्र पर सिर्फ खाली कुर्सियां नजर आईं। न कोई कार्यक्रम, न कोई अधिकारी, न जनप्रतिनिधि बस सन्नाटा। यह हाल तब है जब अभियान की शुरुआत खुद मुख्यमंत्री ने की थी।

यह स्थिति केवल एक दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में गहराई तक फैली उदासीनता की तस्वीर पेश करती है। पहली अप्रैल से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। स्कूलों में नए प्रवेश नाम मात्र के हो रहे हैं, कई जगह बच्चों तक नई किताबें नहीं पहुंची हैं और बीएसए के निर्देशों का पालन भी अधूरा नजर आ रहा है।

इसके साथ ही क्षेत्र में शिक्षकों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

मामला सामने आने के बाद बीएसए डॉ. विनीता ने संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी से जवाब तलब किया है। वहीं बीईओ ने सफाई देते हुए कहा कि वह अवकाश पर थे और संभवतः कर्मचारी कार्यक्रम कराना भूल गए।

अब बड़ा सवाल यही है क्या बच्चों के भविष्य से जुड़ा इतना महत्वपूर्ण अभियान भी लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा? अगर जिम्मेदार ही अपनी भूमिका नहीं निभाएंगे, तो “स्कूल चलो अभियान” कैसे सफल होगा?