जब किसानों के मसीहा को याद कर नमन में झुका मेरठ
मेरठ में रालोद ने भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई। यज्ञ, विचार गोष्ठी और माल्यार्पण कर किसानों व सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।
➡️ भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती
➡️ मेरठ में रालोद ने श्रद्धा से किया आयोजन
➡️ कमिश्नरी स्थित पार्क में यज्ञ व विचार गोष्ठी
➡️ प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अर्पित की श्रद्धांजलि
➡️ किसानों व सामाजिक न्याय के संकल्प को दोहराया
➡️ चौधरी चरण सिंह के विचार आज भी प्रासंगिक
जन माध्यम
हशमे आलम। मेरठ।
किसानों के मसीहा, पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती के अवसर पर मंगलवार को राष्ट्रीय लोकदल द्वारा मेरठ जनपद में श्रद्धा, सम्मान और विचारों का संगम देखने को मिला। कमिश्नरी स्थित चौधरी चरण सिंह पार्क में आयोजित कार्यक्रम में यज्ञ, विचार गोष्ठी और श्रद्धांजलि के माध्यम से महान नेता को नमन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान रालोद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। पूरे वातावरण में उनके सिद्धांतों और संघर्षों की गूंज सुनाई दी। वक्ताओं ने कहा कि चौधरी चरण सिंह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और वंचित समाज की आवाज़ थे, जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया।
विचार गोष्ठी में चौधरी साहब के जीवन, उनके राजनीतिक संघर्ष और किसान हितैषी नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने कहा कि ग्रामीण भारत की आत्मा को समझने और उसे मजबूती देने का काम चौधरी चरण सिंह ने किया। उनका संपूर्ण जीवन किसान, खेत और खलिहान को समर्पित रहा।
इस अवसर पर उपस्थित जनों ने चौधरी चरण सिंह के विचारों और पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया तथा किसानों, ग्रामीण समाज और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब किसान फिर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब चौधरी चरण सिंह के सिद्धांत और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोकदल के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि चौधरी चरण सिंह की विरासत केवल स्मरण का विषय नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में उतारने का संकल्प ही सच्ची श्रद्धांजलि है।