ग्राम पंचायत सचिवों का धरना
कार्यभार और ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में ग्राम पंचायत सचिवों व ग्राम विकास अधिकारियों का बहेड़ी में धरना।
➡️ बढ़ते कार्यभार और संसाधनों की कमी पर बड़ा विरोध
➡️ ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को अव्यवहारिक बताया
➡️ मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन बीडीओ को सौंपा
➡️ जल्द समाधान न हुआ तो बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
➡️ कर्मचारी बोले—विकास कार्य बाधित नहीं, लेकिन सम्मान और सुविधाएँ जरूरी
बढ़ते कार्यभार और अव्यवहारिक ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के खिलाफ विरोध
डेस्क/ जन माध्यम
बहेड़ी,बरेली। बहेड़ी ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों ने अपने बढ़ते कार्यभार, अव्यवहारिक व्यवस्थाओं और विभागीय उपेक्षा के खिलाफ आज ब्लॉक परिसर में एकजुट होकर जोरदार धरना दिया। उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित इस धरने में कर्मचारियों ने साफ कहा कि सरकार उनसे उनके मूल विभागीय दायित्वों से कहीं अधिक काम ले रही है, जबकि इसके लिए न संसाधन दिए गए हैं, न अतिरिक्त कर्मचारी। धरने में मौजूद सचिवों ने बताया कि उन्हें लगातार अन्य विभागों के कार्यों में भी लगा दिया जाता है चाहे वह सर्वे से जुड़े कार्य हों, पोर्टल एंट्री, जनगणना जैसी गतिविधियाँ या गांव स्तर पर विभिन्न योजनाओं का फील्ड वेरिफिकेशन। उनका कहना था कि इतना बोझ होने के बावजूद न तकनीकी सहायता उपलब्ध है और न ही फील्ड में काम करने के लिए आवश्यक संसाधन। सबसे अधिक विरोध ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को लेकर हुआ। कर्मचारियों ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या, बिजली कटौती और फील्ड वर्क की प्रकृति को देखते हुए यह प्रणाली लागू करना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक दबाव और मानसिक तनाव से मुक्ति मिल सके। धरने के दौरान कर्मचारियों ने अपनी सभी समस्याओं का बिंदुवार विवरण देते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन बीडीओ को सौंपा। उन्होंने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
धरने में क्षेत्र के सभी ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम विकास अधिकारी तथा संबंधित कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और अपनी एकता का संदेश दिया। ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों ने कहा कि वे विकास कार्यों में कोई बाधा नहीं चाहते, लेकिन सम्मानजनक कार्य परिस्थितियाँ भी जरूरी हैं।