नगर निगम बोर्ड बैठक में हंगामा,
बरेली नगर निगम की बोर्ड बैठक हंगामे और तीखी बहस के बीच संपन्न हुई, जहां सवालों की बौछार के बीच 978 करोड़ रुपये के पुनरीक्षित बजट को मंजूरी दी गई।
➡️ नगर निगम बोर्ड बैठक में भारी हंगामा
➡️ 978 करोड़ रुपये के पुनरीक्षित बजट पर मुहर
➡️ टैक्स वसूली में गिरावट पर तीखे सवाल
➡️ आवारा कुत्ते व बंदर आतंक पर बहस
➡️ डीडीपुरम हाउस टैक्स हेराफेरी का मुद्दा
➡️ सफाई व्यवस्था और डोर-टू-डोर कलेक्शन पर नाराजगी
➡️ 7 हजार नई स्ट्रीट लाइट खरीदने पर सहमति
➡️ अलाव और स्ट्रीट लाइट खर्च पर सवाल
➡️ वादों और ज़मीनी हकीकत पर सदन में टकराव
जन माध्यम। बरेली।
नगर निगम की पुनरीक्षित विशेष बजट बैठक सोमवार को भारी हंगामे, तीखी नोकझोंक और आरोप प्रत्यारोप के बीच सम्पन्न हुई। शहर की बुनियादी समस्याओं को लेकर पार्षदों का आक्रोश इस कदर फूटा कि कई बार बैठक का माहौल गरमा गया। टैक्स वसूली में गिरावट, आवारा कुत्तों और बंदरों का बढ़ता आतंक, डीडीपुरम में हाउस टैक्स हेराफेरी, बदहाल सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइटों की स्थिति जैसे मुद्दों पर पार्षदों ने अफसरों को कटघरे में खड़ा कर दिया। शोर शराबे के बीच अंतत,978 करोड़ रुपये के पुनरीक्षित बजट को मंजूरी दे दी गई। साथ ही शहर में 7 हजार नई स्ट्रीट लाइट खरीदने पर भी सहमति बनी। मेयर डॉ. उमेश गौतम की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक की शुरुआत से ही तेवर तल्ख रहे। सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना ने टैक्स विभाग पर खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए कहा कि हाउस टैक्स वसूली लगातार गिर रही है, जिससे नगर निगम की आर्थिक सेहत कमजोर हो रही है। उन्होंने किरायेदारों से वसूली का मुद्दा उठाते हुए बताया कि पिछले वर्ष किराये से एक करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई थी, जबकि इस वर्ष दरें बढ़ने के बावजूद अब तक महज 40 लाख रुपये ही वसूले जा सके हैं। इस पर मेयर ने नाराजगी जताते हुए एक लाख रुपये से अधिक के बकायेदारों की सूची तैयार कर सख़्त कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में बंदर और आवारा कुत्तों का आतंक भी बड़ा मुद्दा बना। पार्षदों ने आरोप लगाया कि बंदरों को पकड़कर शहर से बाहर छोड़ने के बजाय भीतर ही छोड़ा जा रहा है, जिससे समस्या और बढ़ रही है। बताया गया कि बंदर पकड़ने के लिए टेंडर निकाले गए, लेकिन एजेंसी नहीं मिल सकी। वन विभाग से लंगूर मंगाने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई। वहीं कुत्तों की नसबंदी और पकड़ अभियान की धीमी रफ्तार पर असंतोष जताया गया।
विज्ञापन पट्टों, डीडीपुरम में हाउस टैक्स हेराफेरी और सफाई व्यवस्था को लेकर भी तीखे सवाल उठे। बिना टेंडर लगे विज्ञापन पट्टों और एजेंसी नाम न होने को नियमों का उल्लंघन बताया गया। डीडीपुरम प्रकरण में पार्षदों ने कहा कि 25 अगस्त को मामला उजागर होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को पूरी तरह विफल करार देते हुए कहा गया कि हर बैठक में यही मुद्दा उठता है, पर सुधार जमीन पर नजर नहीं आता। स्ट्रीट लाइट और अलाव पर खर्च और नतीजों के बीच अंतर ने भी सदन को गर्माया। नौ महीनों में 12 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कई वार्डों में अंधेरा छाया रहने और ठंड में जरूरतमंद इलाकों तक अलाव की लकड़ी न पहुंचने पर नाराजगी जताई गई। व्यंग्य के अंदाज़ में हमला करते हुए गौरव सक्सेना ने गाने के बोल क्या हुआ तेरा वादा गुनगुनाकर पिछली बैठकों में किए गए वादों पर तंज कसा। दीपावली पर 25 और साल में 50 स्ट्रीट लाइट लगाने के वादे अधूरे रहने और नगर निगम की नई बिल्डिंग के बोर्ड हाल का निर्माण एक साल से पूरा न होने का मुद्दा भी जोर शोर से उठा। हंगामे और तीखे सवालों के बीच मंजूर हुआ बजट शहर के लिए उम्मीदें तो लेकर आया, लेकिन सवाल वही रहा क्या काग़ज़ी मंज़ूरियों के साथ ज़मीनी बदलाव भी दिखेगा?
वर्जन
शहर के विकास को लेकर बजट स्वीकृत किया गया है। जनता से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम आय भी बढ़ा रहा है और विकास पर खर्च भी कर रहा है।
डॉ. उमेश गौतम, मेयर
वर्जन
बैठक में नगर निगम की आय एवं व्यय से जुड़े सभी मदों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्वीकृत बजट के अनुरूप विकास कार्यों में तेजी लाई जाए, योजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए और शहर में विकास कार्य धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त