जल निगम अधिकारी ने भीम आर्मी जिलाध्यक्ष को धमकी दी, SC मोहल्ले में दो साल से पानी की किल्लत

बरेली के SC बहुल मोहल्ले में दो वर्षों से जलापूर्ति बंद है। भीम आर्मी जिलाध्यक्ष ने जल निगम अधिकारी पर धमकी और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं।

जल निगम अधिकारी ने भीम आर्मी जिलाध्यक्ष को धमकी दी, SC मोहल्ले में दो साल से पानी की किल्लत
HIGHLIGHTS:

➡️ बरेली के SC मोहल्ले में दो साल से पानी की किल्लत
➡️ भीम आर्मी जिलाध्यक्ष ने जल निगम अधिकारी पर धमकी का आरोप लगाया
➡️ शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज
➡️ अधिकारी के खिलाफ SC/ST Act के तहत कानूनी कार्रवाई की संभावना
➡️ संगठन ने अधिकारी के निलंबन और जांच की मांग की
➡️ जल निगम की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं

जन माध्यम 
बरेली।
भीम आर्मी एकता मिशन के जिलाध्यक्ष और दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके समाजसेवी ने जल निगम के अधिकारी अखिलेश कुमार पांडेय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्राम पखुरनी (थाना भमोरा, ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद) के अनुसूचित जाति (SC) बहुल मोहल्ले में हर घर जल योजना के तहत दो वर्षों से जलापूर्ति पूरी तरह बंद है। टूटी पाइपलाइन से पानी सड़कों और खेतों में बह रहा है, जिससे जल बर्बादी के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।

जिलाध्यक्ष का दावा है कि आसपास के अन्य मोहल्लों में पानी की नियमित आपूर्ति हो रही है, लेकिन SC इलाके को जानबूझकर वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने इसे स्पष्ट जातिगत भेदभाव बताया।

शिकायत के बाद धमकी का फोन
 
29 अक्टूबर 2025 को जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज की (शिकायत संख्या: 40015025057483)। इसके बाद 11 नवंबर को अधिकारी अखिलेश कुमार पांडेय ने कथित तौर पर फोन कर धमकाया: "तुम जैसे भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष मेरे आगे-पीछे घूमते रहते हो, ज्यादा ठेकेदार बनने की कोशिश मत करो, वरना तुम्हारे खिलाफ FIR दर्ज करवा जेल भेज दूंगा।"

जिलाध्यक्ष ने पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर ली है और इसे SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत अपराध बताया है।

भीम आर्मी की चेतावनी
 
संगठन ने इसे दलित समुदाय के दमन की साजिश करार देते हुए अधिकारी के तत्काल निलंबन और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

जल निगम का पक्ष

जन माध्यम ने जल निगम अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन अखिलेश पांडेय या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि शिकायत की जांच चल रही है और यदि धमकी साबित हुई तो उचित कार्रवाई होगी।

कानूनी नजरिया

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रिकॉर्डिंग साबित हो गई तो यह SC/ST Act की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध है, जिसमें 6 माह से 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही, जलापूर्ति में भेदभाव को मानवाधिकार उल्लंघन माना जा सकता है। पूर्व डीएम ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और पीड़ित को सुरक्षा प्रदान करना जरूरी है, वरना सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।