बरेली: सील अस्पताल भवन में नया पंजीकरण, सीएमओ सख्त

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बरेली: सील अस्पताल भवन में नया पंजीकरण, सीएमओ सख्त
HIGHLIGHTS:

मिनी बाईपास रोड स्थित अस्पताल भवन के पंजीकरण और शपथपत्रों के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अपनाया कड़ा रुख।

मुख्य चिकित्साधिकारी ने भवन स्वामी से स्वास्थ्य विभाग को सौंपे गए दस्तावेजों के संबंध में दो दिनों के भीतर मांगा स्पष्टीकरण।

विभाग के अनुसार पूर्व में अनियमितताओं के आरोपों के तहत सील किए गए परिसर में ही दोबारा जारी हुआ था नया पंजीकरण।

जांच में भ्रामक जानकारी या गलत तथ्य पाए जाने पर संबंधित पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने तक की कार्रवाई संभव।

हसीन दानिश / जन माध्यम
बरेली।
मिनी बाईपास रोड स्थित खुसरो अस्पताल और उसी भवन परिसर में अन्नपूर्णा हॉस्पिटल के पंजीकरण से जुड़ा मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. विश्राम सिंह ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए जांच के दायरे को बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रियता के बाद विभागीय अधिकारियों और संबंधित भवन स्वामियों के बीच हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

विभागीय रिकॉर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सितंबर 2024 में स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने विभिन्न विसंगतियों और अनियमितताओं के आरोपों के चलते खुसरो अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की थी। सरकारी दस्तावेजों में यह परिसर आज भी सील अवस्था में ही दर्ज है। बताया जाता है कि इस परिसर के संचालन से शेर अली जाफरी का नाम जुड़ा रहा है, जिनके विरुद्ध पूर्व में प्रशासन द्वारा एक अन्य मामले में वैधानिक कार्रवाई भी अमल में लाई गई थी।

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब वर्ष 2025 में इसी सीलशुदा भवन के भीतर अन्नपूर्णा हॉस्पिटल के नाम से एक नया चिकित्सा पंजीकरण जारी कर दिया गया। जैसे ही यह विसंगति सामने आई, स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त नए अस्पताल का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी गूंज शासन स्तर तक पहुंच गई और फाइलों की दोबारा गहनता से समीक्षा शुरू की गई।

मामले को पूरी तरह संतुलित रखते हुए स्वास्थ्य विभाग हर पहलू को परख रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने भवन स्वामी शेर अली जाफरी से विभाग में जमा किए गए शपथपत्रों के संबंध में दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में तथ्य छुपाने या भ्रामक जानकारी देने की पुष्टि होती है, तो भवन स्वामी और अस्पताल संचालक सलमान खान के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सीएमओ के अंतिम फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।