रिठौरा नगर पंचायत में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही
पैथोलॉजी लैब में बिना पैथोलॉजिस्ट के चल रही जांचें, विभाग की मिलीभगत से मरीजों की जान पर मंडरा रहा खतरा
➡️ रिठौरा में बिना पैथोलॉजिस्ट के चल रही पैथोलॉजी लैब
➡️ अनट्रेंड कर्मचारी कर रहे ब्लड व यूरिन जांच
➡️ स्वास्थ्य विभाग ने बिना डॉक्टर के दिया रजिस्ट्रेशन
➡️ गलत रिपोर्ट से मरीजों की जान को खतरा
हसीन दानिश / जन माध्यम
बरेली। नगर पंचायत रिठौरा में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली अब खुलेआम सामने आ रही है। यहां की पैथोलॉजी लैब में योग्य पैथोलॉजिस्ट की गैरमौजूदगी में अनट्रेंड कर्मचारी जांच कर रहे हैं और गलत रिपोर्ट थमा रहे हैं, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से यह अवैध गोरखधंधा फल-फूल रहा है।
जब लैब में बैठे टेक्नीशियन से पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर के बारे में पूछा गया तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना मोबाइल निकाला और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किया गया रजिस्ट्रेशन दिखाते हुए कहा, “हमारे पास रजिस्ट्रेशन है।” यह रजिस्ट्रेशन देखकर साफ हो जाता है कि स्वास्थ्य विभाग ने बिना किसी योग्य पैथोलॉजिस्ट के मौजूदगी के ही लैब को वैधता दे दी है। विभाग के अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं और नियमों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, रिठौरा की इस मुख्य पैथोलॉजी लैब में एमडी पैथोलॉजी या समकक्ष डिग्री वाला कोई विशेषज्ञ नहीं है। फिर भी अनट्रेंड और अकुशल स्टाफ ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचें कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के बावजूद यहां योग्य पैथोलॉजिस्ट की अनिवार्य निगरानी को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। नतीजा यह है कि मरीजों को गलत रिपोर्ट मिल रही हैं, गलत इलाज हो रहा है और जानलेवा बीमारियां समय पर पता नहीं चल पा रही हैं।
स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। एक पीड़ित परिवार ने बताया, “हम गरीब लोग सरकारी या सस्ती लैब पर भरोसा करते हैं, लेकिन यहां तो विभाग की मिलीभगत से सीधे धोखाधड़ी हो रही है। गलत रिपोर्ट से मरीज की हालत बिगड़ रही है और कोई सुनवाई नहीं।” विशेषज्ञों का कहना है कि बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट के द्वारा की गई जांचें न सिर्फ गलत होती हैं, बल्कि संक्रमण फैलाने और बायोमेडिकल वेस्ट के गलत निपटान का भी खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही और मिलीभगत कोई नई बात नहीं है। देश के कई हिस्सों में इसी तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं, जहां बिना रजिस्ट्रेशन या योग्य स्टाफ के लैब चल रही हैं। लेकिन रिठौरा का मामला इसलिए और गंभीर है क्योंकि विभाग ने खुद अवैध लैब को रजिस्ट्रेशन देकर अपनी संलिप्तता साबित कर दी है।
अब सवाल यह है कि जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कब तक इस घोटाले पर पर्दा डालते रहेंगे? स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता तत्काल जांच, लैब सीलिंग और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से अपील है कि फौरन इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, अवैध रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाए, अनट्रेंड स्टाफ पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। मरीजों का स्वास्थ्य और उनकी जान किसी विभागीय मिलीभगत का शिकार नहीं बननी चाहिए। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी को न्योता दे सकती है।