बरेली: "कलम को दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए खतरा", हिंदी पत्रकारिता दिवस पर जुटे दिग्गज

बरेली में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर ऑल इंडिया प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन (AIPJA) ने संगोष्ठी का आयोजन किया। पत्रकारों ने मीडिया पर बढ़ते हमलों और मुकदमों पर गहरी चिंता जताई।

बरेली:
बरेली में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले केक काटकर उत्सव मनाते और एकजुटता का संकल्प लेते पत्रकार।
HIGHLIGHTS:

चुनौतियों पर मंथन: हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों पर हो रहे हमलों, दबाव और फर्जी मुकदमों को लेकर उठी बुलंद आवाज.

ऐतिहासिक महत्व: देश के पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ और गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महान राष्ट्रनायकों को किया गया नमन.

एकजुटता का संकल्प: AIPJA के जिला अध्यक्ष अरविंदर सिंह मिक्की के आवास पर पत्रकारों ने निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता का लिया संकल्प

बरेली। हिंदी पत्रकारिता दिवस के पावन अवसर पर शनिवार को ऑल इंडिया प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन (AIPJA) के जिला अध्यक्ष अरविंदर सिंह मिक्की के आवास पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले भर के पत्रकारों ने हिस्सा लिया और वर्तमान दौर में निष्पक्ष पत्रकारिता के सामने खड़ी चुनौतियों, बढ़ते दबावों और पत्रकारों पर दर्ज होने वाले मुकदमों को लेकर गहरा मंथन किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने का कोई भी प्रयास देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए घातक है।

'उदन्त मार्तण्ड' के गौरवशाली इतिहास को किया याद

संगोष्ठी के दौरान हिंदी पत्रकारिता के स्वर्णिम और गौरवशाली इतिहास को याद किया गया। वक्ताओं ने गणेश शंकर विद्यार्थी, पंडित विष्णु पराड़कर और माखनलाल चतुर्वेदी जैसे महान पत्रकारों के त्याग को नमन किया। उन्होंने बताया कि देश के पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ ने जिस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में जनजागरण की मशाल जलाई थी, उसी मशाल को आज भी जलाए रखने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है।

संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) का हो सम्मान: वरिष्ठ पत्रकार

वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि आज जमीनी स्तर पर काम कर रहे संवाददाताओं को खबरों के संकलन के दौरान अभूतपूर्व प्रशासनिक और सामाजिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत देश के हर नागरिक और मीडिया को जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली है, उसका सम्मान होना ही चाहिए। कतिपय अधिकारियों द्वारा तथ्यों को दबाने के लिए पत्रकारों को रोकने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।

फेक न्यूज के दौर में जिम्मेदारी और बढ़ी

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भीम मनोहर, हेमंत शर्मा और मनोज शर्मा ने कहा कि पत्रकार स14माज और शासन के बीच का आईना होते हैं। वहीं कौशिक टंडन और आदित्य रस्तोगी ने तकनीकी युग में सोशल मीडिया पर फैलने वाली 'फेक न्यूज' को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जिम्मेदार, सत्यनिष्ठ और तथ्यपरक पत्रकारिता की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। उत्तराखंड से आए सुमित मेहरा और अमरीत सिंह ने भी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एकजुट होने की बात कही।

सुरक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेगा संगठन

AIPJA के जिला अध्यक्ष अरविंदर सिंह मिक्की ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों और मूल्यों के प्रति संकल्प लेने का दिन है। उनका संगठन पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहेगा।

इस गरिमामयी संगोष्ठी में मुख्य रूप से प्रदीप सक्सेना, राहुल सक्सेना, सुनील सिंह, अमित आनंद, पवन कालरा, अभिषेक प्रताप सिंह, प्रवेश कुमारी, तरुण सूरी, दुष्येंद्र सिंह, सुमित श्रीवास्तव और अरविंदर कपूर सहित भारी संख्या में पत्रकार व प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।