बरेली कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों का फूटा गुस्सा; ईपीएफ में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगा EPFO दफ्तर में सौंपा ज्ञापन
बरेली कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों ने कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों का आरोप है कि ईपीएफ की कटौती नियमों के विरुद्ध केवल मूल वेतन पर की गई, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।
बरेली कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों ने भविष्य निधि खातों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और विसंगति का संगीन आरोप लगाया है.
कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के मुताबिक, ईपीएफ की कटौती नियमविरुद्ध सिर्फ मूल वेतन पर की गई, जबकि इसमें महंगाई भत्ता भी शामिल होना अनिवार्य था.
पीड़ित कर्मचारियों ने ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचकर अपनी व्यक्तिगत शिकायतों का प्रारूप और साक्ष्य जनसंपर्क अधिकारी को सौंपे.
कर्मचारी नेताओं ने मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों व दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई कर प्रभावित कर्मचारियों के आर्थिक नुकसान की तुरंत भरपाई की जाए.
जन माध्यम
बरेली। रुहेलखंड अंचल के प्रतिष्ठित बरेली कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। कॉलेज प्रशासन द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के प्रबंधन और कटौती में की गई गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। 'कर्मचारी कल्याण सेवा समिति' के बैनर तले एकजुट हुए दर्जनों पीड़ित अस्थायी कर्मचारियों ने ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय पर धावा बोलकर पुरजोर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों का एक विस्तृत शिकायती ज्ञापन सौंपा।
समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा के कुशल नेतृत्व में पीएफ दफ्तर पहुंचे कर्मचारियों ने केवल नारेबाजी ही नहीं की, बल्कि पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। सभी प्रभावित कर्मचारियों ने अपनी व्यक्तिगत वित्तीय विसंगतियों से जुड़े निर्धारित प्रारूपों को भरा और उनके साथ कॉलेज से प्राप्त वेतन पर्ची व आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न कर पीएफ कार्यालय के जनसंपर्क अधिकारीको जमा कराया।
समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने ईपीएफओ अधिकारियों के समक्ष गड़बड़ी का भंडाफोड़ करते हुए बताया कि बरेली कॉलेज प्रबंधन द्वारा अस्थायी कर्मचारियों के हितों की घोर अनदेखी की जा रही है। ईपीएफओ के स्थापित वैधानिक नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के भविष्य निधि खाते के लिए अंशदान की कटौती उसके मूल वेतन और महंगाई भत्ते दोनों को जोड़कर की जानी चाहिए।
परंतु, कॉलेज प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर केवल मूल वेतन पर ही पीएफ की कटौती की और महंगाई भत्ते को इस गणना से पूरी तरह बाहर रखा। इस गंभीर विसंगति के कारण कर्मचारियों के पीएफ खातों में बेहद कम रकम जमा हुई, जिससे उनके भविष्य और पेंशन फंड को भारी वित्तीय आघात लगा है।
कर्मचारी संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि ईपीएफओ तुरंत एक विशेष ऑडिट टीम बनाकर बरेली कॉलेज के अस्थायी कर्मचारियों के पिछले वर्षों के पीएफ खातों की सघन जांच करे। इसके साथ ही, इस वित्तीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों व बाबुओं को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि जो भी वित्तीय नुकसान उन्हें अब तक हुआ है, कॉलेज प्रबंधन से उसकी शत-प्रतिशत आर्थिक क्षतिपूर्ति (ब्याज सहित) कराई जाए।
इस महत्वपूर्ण शिकायती प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से हरीश मौर्य, राजाराम, श्याम सुंदर, भीकम सिंह गुर्जर, तेजपाल, रामपाल, पूरनलाल मसीह, श्रीराम और ओमप्रकाश यादव सहित दर्जनों पीड़ित अस्थायी कर्मचारी उपस्थित रहे और अपनी आवाज बुलंद की।