रिठौरा में अकीदत से मनाया गया हज़रत मस्तान शाह मियां का उर्स
बरेली के रिठौरा में हज़रत मस्तान Shah मियां का सालाना उर्स अकीदत और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। कुरानख्वानी और कुल शरीफ के साथ अमन-चैन की दुआएं की गईं।
रिठौरा में अकीदत के साथ मनाया गया सालाना उर्स
कुरानख्वानी और मिलाद शरीफ से हुआ आगाज़
मुल्क की सलामती और भाईचारे के लिए हुई दुआ
उर्स में बड़ी संख्या में पहुंचे जायरीन
हसीन दानिश। जन माध्यम
रिठौरा। बरेली। नगर पंचायत रिठौरा में स्थित हज़रत मस्तान शाह मियां की दरगाह रविवार को अकीदत, मोहब्बत और रूहानी माहौल से सराबोर नजर आई। सालाना उर्स के मौके पर दूर-दराज इलाकों से बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद दरगाह पहुंचे और हाजिरी देकर अपनी मन्नतें मांगीं। पूरे दिन दरगाह परिसर में नात और मनकबत की सदाएं गूंजती रहीं, जिससे माहौल पूरी तरह रूहानी रंग में रंग गया।
उर्स का आगाज़ सुबह कुरानख्वानी से हुआ। इसके बाद मिलाद शरीफ की महफिल सजाई गई, जिसमें उलमा-ए-किराम ने हज़रत मस्तान शाह मियां की जिंदगी और उनकी सूफियाना तालीमात पर विस्तार से रोशनी डाली। वक्ताओं ने कहा कि सूफी संतों ने हमेशा इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया है और समाज को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया है।
जामा मस्जिद के इमाम हाफिज़ मुकर्रम रजा साहब ने अपने खास अंदाज में नात-ए-पाक पेश की, जिसे सुनकर मौजूद अकीदतमंद झूम उठे। वहीं सूफी उवैस मियां ने मनकबत पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। नात और मनकबत के दौरान लोगों ने पूरे अदब और एहतराम के साथ हिस्सा लिया।
इसके बाद कुल शरीफ की रस्म अदा की गई, जिसमें मुल्क हिंदुस्तान की सलामती, तरक्की, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। मौजूद लोगों ने देश में अमन-चैन कायम रहने और सभी समुदायों के बीच मोहब्बत और सौहार्द बना रहने की दुआ की।
उर्स के समापन पर दरगाह परिसर में लंगर तक्सीम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। भीषण गर्मी को देखते हुए अकीदतमंदों के लिए ठंडे शरबत की सबील भी लगाई गई, जो देर दोपहर तक जारी रही। लोगों ने लंगर और सबील की व्यवस्था की सराहना की।
इस मौके पर हाफिज़ नाजिम, नाजिम हुसैन, मोहम्मद हसन, मोअज्जम इम्तियाज, सभासद अब्दुल हलीम, ज़ाकिर मेंबर, असलम भाई प्याज वाले, इकरार अंसारी उर्फ मियां, मोहम्मद सईद उर्फ छोटे जी, मोहम्मद शकील, मोहम्मद सईद रब्बानी, अखलाक, अनीस हलवाई, अली अहमद पत्रकार, राजा खान, मोहम्मद तौहीद, मोहम्मद अशरफ, मोहम्मद तस्लीम, बंटी अंसारी और मोहम्मद तैय्यब अंसारी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।